![]() पवित्रता अगर ह्रदय में वास करती है तो सात्विकता मन में आ ही जाती है और ये ऐसा गुण है जो हमे हर अधर्म को करने से रोकता है और सदैव ही हमे सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति देता है वही कुटिलता कुविचार हमारे मन और ह्रदय को एक बीमारी की तरह ग्रसित कर लेते है और हम धीरे धीरे नरक के मार्ग पर चलते जाते है |
Saturday, October 1, 2016
Thursday, September 1, 2016
क्या दुसरे को दर्द देकर ही ,,,,,,,,,,,,सुकून मिलता है आजकल ,,,,,,,,,या ??????????
शायद आजकल की ये प्रथा बन गयी है या आदत ,,,,,,,या कमजोरी ,,,,लोग अपनी अपेक्षाओ के अनुरूप सिको परिभाषित करते है क्योकि आज जो चल रहा है ,,,,,,,,और जो कल हमारा आने वाला है वो सिर्फ स्वार्थ और धोखे से सना हुआ है बस,,,इससे ज्यादा कुछ नही क्योकि हम अपनी कुत्षित और लोभी मानसिकता के जैसे गुलाम हो गये इसलिए हम गलत और सही में भेद ही नही कर पा रहे है बस जो भी कर रहे है उसे हठपूर्वक सही साबित करने की कोशिश में लगे रहते है लेकिन ऐसा कब तक ,,एक ना एक दिन तो इसका दुष्परिणाम हमे भुगतना ही पड़ेगा तो क्यों ना हम अपनी आदतों में सुधार करे और मनुष्यता को धारण कर अपने साथ साथ अपने समाज और देश का भी हित करे
इसलिए प्रतिस्पर्धा करे लेकिन नए युग के निर्माण के लिए नाकि विनाश के लिए और इस धारणा को अपने मन से निकाल कर एक अच्छी सोच के साथ किसी को ख़ुशी देकर भी अपने दिल को सुकून पंहुचा सकते है ,,,,,,,,तो करते है एक छोटी सी पहल ,,,,,,,,,,,,,,
जय हिन्द जय भारत ||||||||||||
इसलिए प्रतिस्पर्धा करे लेकिन नए युग के निर्माण के लिए नाकि विनाश के लिए और इस धारणा को अपने मन से निकाल कर एक अच्छी सोच के साथ किसी को ख़ुशी देकर भी अपने दिल को सुकून पंहुचा सकते है ,,,,,,,,तो करते है एक छोटी सी पहल ,,,,,,,,,,,,,,
जय हिन्द जय भारत ||||||||||||
Wednesday, August 31, 2016
जाने कैसा है मेरा भारत ????????????
जाने कैसा है मेरा भारत ????????????
जैसा मैं सुनता रहता था ?////////
सपनो में बुनता रहता था,,,,,,,,,
दादा दादी के किस्सों में ,,,,,,
अपना सा लगता था भारत,,,
अब देखता हु ,,,मन भर जाता है ,,,,
क्या ऐसा ही था भारत ,,,,,,,,,,
इतना संवेदनहीन हुआ कैसे ,,,,
इंसान हैवान बना कैसे ,,,
ना तड़प रही,,,,, ना दर्द बचा ,,
हृदयविहीन इंसान हुआ,,,
ना ममता है ,,,ना करुणा है ,,,,,,,,,,
जैसे सुनसान हुआ भारत
क्या मेरा भारत ऐसा था ,,,
सपनो में जिसको बुनता था ,,,,,,,,
सोने की चिड़िया कहते थे ,,,
अब तो हैवान बने है हम ,,,,,,
कैसे शैतान बने है हम,,,
आओ एक निश्चय करते है ,,,
भारत निर्माण हम करते है,,,
एक ऐसा भारत बनाये हम
जिसकी दुनिया गुणगान करे,,,,,,,,,,,
अपराधमुक्त,,भ्रष्टाचार मुक्त,,,
शिक्षा का प्रचार करे
नये भारत का निर्माण
नये रक्त का संचार करे
जय हिन्द
जय भारत
जैसा मैं सुनता रहता था ?////////
सपनो में बुनता रहता था,,,,,,,,,
दादा दादी के किस्सों में ,,,,,,
अपना सा लगता था भारत,,,
अब देखता हु ,,,मन भर जाता है ,,,,
क्या ऐसा ही था भारत ,,,,,,,,,,
इतना संवेदनहीन हुआ कैसे ,,,,
इंसान हैवान बना कैसे ,,,
ना तड़प रही,,,,, ना दर्द बचा ,,
हृदयविहीन इंसान हुआ,,,
ना ममता है ,,,ना करुणा है ,,,,,,,,,,
जैसे सुनसान हुआ भारत
क्या मेरा भारत ऐसा था ,,,
सपनो में जिसको बुनता था ,,,,,,,,
सोने की चिड़िया कहते थे ,,,
अब तो हैवान बने है हम ,,,,,,
कैसे शैतान बने है हम,,,
आओ एक निश्चय करते है ,,,
भारत निर्माण हम करते है,,,
एक ऐसा भारत बनाये हम
जिसकी दुनिया गुणगान करे,,,,,,,,,,,
अपराधमुक्त,,भ्रष्टाचार मुक्त,,,
शिक्षा का प्रचार करे
नये भारत का निर्माण
नये रक्त का संचार करे
जय हिन्द
जय भारत
क्या इतना सुन्दर है जीवन ???????????
कुछ नैनों में है अश्रु छिपे,,,,,,,
जाने कितने दिन तुम बिन बीते ,,,
तन्हा ख़त पढता रहता हु,,,
हाँ चांदनी इन रातो में
बजती है पायल की छम छम
कुछ मन में मेरे है खालीपन ,,,
क्या??????? इतना सुन्दर है जीवन,,
लोगो की प्रेमकहानी है,,
उसमे मदमस्त जवानी है ,,,
कुछ नगमे है ,,,कई वादे है ,,,
जब खुद से मैं बाते करता हु ,,,,
जैसे रोता है मेरा बचपन ,,,,
क्या??????? इतना सुन्दर है जीवन,,
क्या सपने भी सच होते है ,,,
क्या वो भी अपने होते है ,,,,,
या पैसा ही सब कुछ होता है,,,
पैसे से सपने मिलते है ,,,
या खोये बचपन मिलते है ,,,,
बस यही सोचकर हाँ मैं भी ,,,
जाने क्यों भटके पागल मन
क्या??????? इतना सुन्दर है जीवन,,
क्या??????? इतना सुन्दर है जीवन,,
जाने कितने दिन तुम बिन बीते ,,,
तन्हा ख़त पढता रहता हु,,,
हाँ चांदनी इन रातो में
बजती है पायल की छम छम
कुछ मन में मेरे है खालीपन ,,,
क्या??????? इतना सुन्दर है जीवन,,
लोगो की प्रेमकहानी है,,
उसमे मदमस्त जवानी है ,,,
कुछ नगमे है ,,,कई वादे है ,,,
जब खुद से मैं बाते करता हु ,,,,
जैसे रोता है मेरा बचपन ,,,,
क्या??????? इतना सुन्दर है जीवन,,
क्या सपने भी सच होते है ,,,
क्या वो भी अपने होते है ,,,,,
या पैसा ही सब कुछ होता है,,,
पैसे से सपने मिलते है ,,,
या खोये बचपन मिलते है ,,,,
बस यही सोचकर हाँ मैं भी ,,,
जाने क्यों भटके पागल मन
क्या??????? इतना सुन्दर है जीवन,,
क्या??????? इतना सुन्दर है जीवन,,
Friday, August 12, 2016
जब लहराता है तिरंगा,,,,मेरा ये प्यारा झंडा तन मन खिल सा जाता है ,,,,, हर लम्हा मुस्कराता है ,,,,,,,,, भुजाये रह रह कर फडकती है ,,, जैसे शिव की जटा में लहराए,,,माँ गंगा ,,, जब लहराता है तिरंगा,,,,मेरा ये प्यारा झंडा कितना इंतज़ार करते थे,,,,रह रह कर कैलेंडर देखते थे ,,,,,, कब आएगी छब्बीस जनवरी,,,,कब आएगा पन्द्रह अगस्त ,,,,,,,,, जाने वो कैसा बचपन था ,,,,जब हर घर की छत पर,,,, लहराता था तिरंगा,,,,, जब लहराता है तिरंगा,,,,मेरा ये प्यारा झंडा बच्चो की वो टोली संग,,,,होती थी प्रभात फेरी ,,, गाते थे देशभक्ति गाने,,,,,साथ में भारत माँ की जय जयकार ,,, जाने वो कैसे रिश्ते थे ,,,,जिनमे था ढेर सारा प्यार ,,,, अब भी हम एक है हर जन जन हर मन मन चाहे हो हिन्दू हम कोई चाहे हो मुस्लिम हम कोई चाहे हो कोई भी भाषा चाहे हो कोई भी बोली लेकिन हम थे भारतीय और हम है भारतीय है एकता ही हमारी शक्ति करते माँ भारती की भक्ति है ऊँचा है ये तिरंगा सदा ऊँचा ये रहेगा जब लहराता है तिरंगा,,,,मेरा ये प्यारा झंडा जब लहराता है तिरंगा,,,,मेरा ये प्यारा झंडा
जब लहराता है तिरंगा,,,,मेरा ये प्यारा झंडा
तन मन खिल सा जाता है ,,,,,
हर लम्हा मुस्कराता है ,,,,,,,,,
भुजाये रह रह कर फडकती है ,,,
जैसे शिव की जटा में लहराए,,,माँ गंगा ,,,
जब लहराता है तिरंगा,,,,मेरा ये प्यारा झंडा
कितना इंतज़ार करते थे,,,,रह रह कर कैलेंडर देखते थे ,,,,,,
कब आएगी छब्बीस जनवरी,,,,कब आएगा पन्द्रह अगस्त ,,,,,,,,,
जाने वो कैसा बचपन था ,,,,जब हर घर की छत पर,,,,
लहराता था तिरंगा,,,,, जब लहराता है तिरंगा,,,,मेरा ये प्यारा झंडा
बच्चो की वो टोली संग,,,,होती थी प्रभात फेरी ,,,
गाते थे देशभक्ति गाने,,,,,साथ में भारत माँ की जय जयकार ,,,
जाने वो कैसे रिश्ते थे ,,,,जिनमे था ढेर सारा प्यार ,,,,
अब भी हम एक है
हर जन जन
हर मन मन
चाहे हो हिन्दू हम कोई
चाहे हो मुस्लिम हम कोई
चाहे हो कोई भी भाषा
चाहे हो कोई भी बोली
लेकिन हम थे भारतीय
और हम है भारतीय
है एकता ही हमारी शक्ति
करते माँ भारती की भक्ति
है ऊँचा है ये तिरंगा
सदा ऊँचा ये रहेगा
जब लहराता है तिरंगा,,,,मेरा ये प्यारा झंडा
जब लहराता है तिरंगा,,,,मेरा ये प्यारा झंडा
जय हिन्द ||
जय भारत ||
Thursday, August 11, 2016
धीरे धीरे ,,,,,,,,,,,मरती इंसानियत ??????????/
क्या ये सच है ये हमारा आज है ,,,,,,,,,लेकिन कुंठित मन से हमे ये स्वीकार करना पड़ रहा है की हाँ यही हमारा आज है और जाने कैसा होगा कल ???????????जाने कितने प्रश्न है अभी मेरे मन में जिनके उत्तर है मेरे पास लेकिन वो बहुत ही भयावह है हम सबके लिए ,,,की तड़प तड़प कर कोई इंसान मर जाए ,,,,,,,,,,लेकिन राह चलने वालो का दिल जैसे पत्थर का हो गया हो ,,,,,,,,या उनको भी शायद इसी पल का इतजार है की उनका भी कोई अपना ही या खुद वो स्वयं ऐसे ही तडपते हुए पड़े हो रो रहे हो चिल्ला रहे हो ,,,दर्द से कराह रहे हो ,,,,,तभी उनको ये एहसास होगा ,,,,,,,,,,,,क्या यही वो हमारा भारत श्रेष्ठ है जहां की संस्कृति सम्पूर्ण विश्व में विख्यात है ,,,,,,,आज इसी देश के लोग इतने संवेदनहीन कैसे हो सकते है ,,,,,,,,,,इतने निष्ठुर कैसे हो सकते है ,,,,,,,,,,,या सारा का सारा महारत हम सिर्फ और सिर्फ बातो में ही करना जानते है ,,,,,,,,,,,मेरी पूरे देश से यही आग्रह है की कम से कम इतनी सद्या तो होनि ही चाहिए ,,,,,,,,,क्या पता कल हम भी इसी जगह हो ,,,,,,,,,फिर,,,,,,,
इसलिए किसी भी जीव को अगर जीवनदान दे सकते है उसके प्राणों की रक्षा करने में जो भी बन पड़े वो हमे करना चाहिए ,,,,,,
"इतना घ्रणित कार्य मत कीजिये की खुद से ही घ्रणा होने लगे"
जय हिन्द
जय भारत
Friday, August 5, 2016
रिश्तों के हार जुड़े तुझसे ,,,,,,,,,,,,मन के इकरार जुड़े तुझसे ,,,
रिश्तों के हार जुड़े तुझसे ,,,,,,,,,,,,मन के इकरार जुड़े तुझसे ,,,
चाहे हाँ बोले या ,,,,,ना बोले ,,,दिल जाने क्यूँ प्यार करे तुझसे,,,
साँसों की ये जो माला है ,,,,,जैसे भोले की मृगछाला है ,,,
मैं पार्वती तेरे मन की ,,,,अर्पण संसार मेरा तुझपे,,,,
चाहे सुख आये ,,,चाहे दुःख आये ,,,,,,,,
चाहे चहुँओर घनघोर अँधेरा छा जाए,,,
तेरी मैं रहूँ,,,मेरा तू रहे,,,
तू मेरी बंसी बन जाये,,,,
चाहे हाँ बोले या ,,,,,ना बोले ,,,दिल जाने क्यूँ प्यार करे तुझसे,,,
साँसों की ये जो माला है ,,,,,जैसे भोले की मृगछाला है ,,,
मैं पार्वती तेरे मन की ,,,,अर्पण संसार मेरा तुझपे,,,,
चाहे सुख आये ,,,चाहे दुःख आये ,,,,,,,,
चाहे चहुँओर घनघोर अँधेरा छा जाए,,,
तेरी मैं रहूँ,,,मेरा तू रहे,,,
तू मेरी बंसी बन जाये,,,,

