Tuesday, May 23, 2017
Sunday, January 1, 2017
Sunday, December 4, 2016
प्रकृति भी हमारे अच्छे मित्र की तरह है ,,,सुन्दर ,,,निश्छल,,,
सच में कितना अप्रतिम एहसास है ये की मैं चल रहा हूँ एक अनजाने सफ़र में बिना थके बिना रुके बस अकेला तन्हा चला जा रहा हूँ काफी देर बीत गयी और कुछ देर मुझे अकेले पन का एहसास हुआ तो सोचा कुछ अलग किया जाए तभी मेरी नजर बस की खिड़की से बहार की तरफ पड़ी जहां प्रकृति अक अनुपम नजारा था और उनमे जैसे मैं खो गया उन्ही एहसासों में मैं खोया हुआ था की एक किसी पेड़ की पत्ती का टुकड़ा मेरे पैर पर आकर गिरा वो देखने में बहुत सुन्दर लग रहा था मैं उसे कुछ पल निहारता रहा फिर धीरे धीरे वो एक साथी की तरह बाते करने लगा जाने कब उससे मेरी मित्रता हो गयी और सच में वो एहसास वो आनंद अच्र्य्जनक था मेरे लिए सच में प्रकृति के मनोरम रूप में ओझल होना बहुत आसान है बस आपकी काल्पनिक शक्ति और सोचने की क्षमता सुन्दर और निश्छल होनी चाहिए फिर ये निर्जीव भी हमे जीवित से प्रतीत होंगे ,,,और जिन्हें हम पराया समझते है वो भी हमे अपनों से बढ़कर लगेंगे इसीलिए सच में ये जिन्दगी बहुत ही खूबसूरत है बस इसको बेहतर ढंग से जीने की कला आपको पता होनी चाहिए
आशा की जीवन डोर लिए ,,, जाने इधर उधर पथ में भटके ,,,
आशा की जीवन डोर लिए ,,,
जाने इधर उधर पथ में भटके ,,,
ना मंजिल का है पता उसे,,,
जाने क्यों व्याकुल मन है ये ,,,
कभी हँसता है ,,,
कभी रोता है,,,
कभी जागे ,,तो ,,
कभी सोता है ,,,
जाने कैसी परछाई है ,,,
स्पष्ट नही है ,,
धुंधली सी ,,,
जैसे अंधियारे में जाऊ ,,,
वो खो जाए ,,,
हाँ मन है मेरा मन पागल ,,,
जो ,,आशा की जीवन डोर लिए ,,,
जाने इधर उधर पथ में भटके ,,,
शब्दों पर है सयम जो नही ,,,
है शत्रु जमाना मेरा हुआ ,,,
मैं अपनी मनोदशा किस्से कहूं ,,,
जो उसके प्रेम में पागल हुआ ,,
सूखे पत्ते सा गिर जो गया ,,,
पैरों के तले रौंदा मैं गया
शीशे की तरह जो बिखर गया ,,,
फिर भी ,,बाहे फैलाए खड़ा रहा ,,
नैनो से बिन बादल नीर बहे ,,
आशा की जीवन डोर लिए ,,,
जाने इधर उधर पथ में भटके ,,,
जाने इधर उधर पथ में भटके ,,,
ना मंजिल का है पता उसे,,,
जाने क्यों व्याकुल मन है ये ,,,
कभी हँसता है ,,,
कभी रोता है,,,
कभी जागे ,,तो ,,
कभी सोता है ,,,
जाने कैसी परछाई है ,,,
स्पष्ट नही है ,,
धुंधली सी ,,,
जैसे अंधियारे में जाऊ ,,,
वो खो जाए ,,,
हाँ मन है मेरा मन पागल ,,,
जो ,,आशा की जीवन डोर लिए ,,,
जाने इधर उधर पथ में भटके ,,,
शब्दों पर है सयम जो नही ,,,
है शत्रु जमाना मेरा हुआ ,,,
मैं अपनी मनोदशा किस्से कहूं ,,,
जो उसके प्रेम में पागल हुआ ,,
सूखे पत्ते सा गिर जो गया ,,,
पैरों के तले रौंदा मैं गया
शीशे की तरह जो बिखर गया ,,,
फिर भी ,,बाहे फैलाए खड़ा रहा ,,
नैनो से बिन बादल नीर बहे ,,
आशा की जीवन डोर लिए ,,,
जाने इधर उधर पथ में भटके ,,,
Friday, November 25, 2016
ये स्वार्थ क्या ,,, परमार्थ क्या ,,, ये प्रेम क्या,,,, विस्वास क्या ,,
ये स्वार्थ क्या ,,,
परमार्थ क्या ,,,
ये प्रेम क्या,,,,
विस्वास क्या ,,
कैसा ये छल ,,,
जो कर रहा दुर्बल,,,
ये मन के सब विक्षोभ है,,,
क्योकि,,
मन में रहते है कृष्ण भी ,,,
है कंस भी धुंधला सा,,
ये जात क्या,,
ये धर्म क्या,,,
ये यूपी ,,और
महाराष्ट्र क्या,,,,
पूछे कोई पहचान उनसे,,,
जो त्याग की परिभाषा है ,,,
पूछे कोई मजहब उनसे,,,
जिनका देश ही परिवार है ,,,,
न जान की कीमत कोई ,,,,
आखिरी सांस तक ,,,,,बस
राष्ट्र का सम्मान है,,,
है बसंती रंग से प्यार उनको
तिरंगा उनकी शान है ,,,,
ना हिन्दू है ,,,
ना मुश्लिम है ,,,
मेरे देश का सम्मान है ,,,
पहचान उनकी हिन्द है
माँ भारती का अभिमान है
चेहरे पर ना रहती शिकन
सरहद खेल के मैदान है
वो सिर्फ हिन्दुस्तानी है
मेरे देश का सम्मान है ,,,
ये स्वार्थ क्या ,,,
परमार्थ क्या ,,,
ये प्रेम क्या,,,,
विस्वास क्या ,,
जय हिन्द
जय भारत
परमार्थ क्या ,,,
ये प्रेम क्या,,,,
विस्वास क्या ,,
कैसा ये छल ,,,
जो कर रहा दुर्बल,,,
ये मन के सब विक्षोभ है,,,
क्योकि,,
मन में रहते है कृष्ण भी ,,,
है कंस भी धुंधला सा,,
ये जात क्या,,
ये धर्म क्या,,,
ये यूपी ,,और
महाराष्ट्र क्या,,,,
पूछे कोई पहचान उनसे,,,
जो त्याग की परिभाषा है ,,,
पूछे कोई मजहब उनसे,,,
जिनका देश ही परिवार है ,,,,
न जान की कीमत कोई ,,,,
आखिरी सांस तक ,,,,,बस
राष्ट्र का सम्मान है,,,
है बसंती रंग से प्यार उनको
तिरंगा उनकी शान है ,,,,
ना हिन्दू है ,,,
ना मुश्लिम है ,,,
मेरे देश का सम्मान है ,,,
पहचान उनकी हिन्द है
माँ भारती का अभिमान है
चेहरे पर ना रहती शिकन
सरहद खेल के मैदान है
वो सिर्फ हिन्दुस्तानी है
मेरे देश का सम्मान है ,,,
ये स्वार्थ क्या ,,,
परमार्थ क्या ,,,
ये प्रेम क्या,,,,
विस्वास क्या ,,
जय हिन्द
जय भारत
Friday, November 18, 2016
बहुत मीठे है वो अलफ़ाज़ ,,,जिनमे तुम हो ,,, या तुम्हारा नाम ,,,,या तुम्हारी खुशबू ,,,,
बहुत मीठे है वो अलफ़ाज़ ,,,जिनमे तुम हो ,,,
या तुम्हारा नाम ,,,,या तुम्हारी खुशबू ,,,,
सच में ,,,इसके सिवा
ना कुछ ,,सीखा है ,,,ना कुछ जाना है
अब ये तुम्हारा ,,जादू है ,,या कुछ और ,,,
जो बिना मिले तुमसे ,,,चढ़ता ही जाता है ,,,
सच में मेरे ख्वाबो की ,,,,मुमताज हो तुम ,,,
मैं दीवाना शाहजहाँ ,,,हूँ अपने ,,बिखरे हुए दिल का,,,
सच में ,,ना इसके सिवा कुछ ,,,देखा है ,,,ना माना है
बस तुम हो ,,,,बस तुम हो ,,,,
या तुम्हारा नाम ,,,,या तुम्हारी खुशबू ,,,,
सच में ,,,इसके सिवा
ना कुछ ,,सीखा है ,,,ना कुछ जाना है
अब ये तुम्हारा ,,जादू है ,,या कुछ और ,,,
जो बिना मिले तुमसे ,,,चढ़ता ही जाता है ,,,
सच में मेरे ख्वाबो की ,,,,मुमताज हो तुम ,,,
मैं दीवाना शाहजहाँ ,,,हूँ अपने ,,बिखरे हुए दिल का,,,
सच में ,,ना इसके सिवा कुछ ,,,देखा है ,,,ना माना है
बस तुम हो ,,,,बस तुम हो ,,,,




