रिश्तो का बंधन भी कैसा होता है जो एक कच्चे धागे में हमे अपनों से जोड़े रखती है और हमारे मन में भी हर लम्हे जाने कितने प्रेम के सागर उमड़ते रहते है जो हमारे एहसासों को और हमारे सपनो को असीम ऊर्जा से संचारित करता है जिससे ना सिर्फ हमे जीने की शक्ति मिलती है अपितु हमे एक अच्छा इंसान बनाने में सहायक होती है और मानवता की राह में चलने को हर पल प्रेरित करती है
कुछ मन में उलझन है ये वही आज है जिसके सपने देखे थे कल नही ऐसा नही हो सकता ये कैसा संवाद है या किसी विवाद की आहट जैसे बोझिल लग रहा है जीवन क्यों ना उन नस्लो को जड़ से ही काट दूं जिनने छीनने की कोशिश की है हमारा े चैनो अमन की जो देश का सम्मान नही कर सकते वो सिर्फ उपेक्षित होने चाहिए क्यों हम सहन करे ऐसी असहनशीलता ऐसे समाज से अच्छा समाजहीन हो जाए हम कुछ इसीलिए भटक रहा है ये मन
चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान जो भी इस देश का सम्मान नही कर सकता वो कतई भारतीय कहलाने लायक नही है जितनी मुझे जानकारी है इन सब मुद्दों से एक आम भारतीय का कोई लेना देना नही है हम साथ साथ खेले है साथ स्कूल में पढ़े है साथ में भाईचारे के साथ काम करते है हमे पता भी नही ये जाती धर्म क्या है ये नफरत का बीज हमारे अंदर ये राजनीतिक पार्टिया चन्द वोटो के लिए बोती है और हम आशानी से इसके शिकार हो जाते है थोडा भी अपने विवेक से काम नही लेते है सभी मित्रो से मेरा हार्दिक अनुरोध है की नाही देशद्रोही बाते करे नाही उनका समर्थन
मैं इक रचना रच दूं माँ भारती को मैं भी उनके चरणो में मैं कुछ शब्द अर्पित कर दूं चाहे कट जाए सर हो जाए भुजा अलग मैं अंतिम क्षणों में भारत माता की जय कर लूँ हर लम्हे में माँ तेरी यादे है बचपन और जवानी तेरे आँचल में पली है मेरी जननी मेरी माँ भारत माता की जय कर लूँ कतरा कतरा मेरा कृतज्ञ है तेरा मेरे मन के ह्रदय में है माँ भारती का बसेरा कुछ कपूत भी है तेरे दामन में माँ उनके सर को धड़ से अलग मैं कर दूँ माँ भारती को कोटि कोटि नमन मैं कर लूँ
सम्बोधन चाहे जो भी हो भाई का अर्थ भी वही है भाईजान का मतलब भी वही माँ का अर्थ भी वही है अम्मी का मतलब भी वही है चाहे हम माँ कहे या अम्मीजान माँ की ममता को मापने के लिये कोई यन्त्र नही बना है तो हम छोटी छोटी बातो को इतना बड़ा क्यों करए है जिससे भारतीय जनमानस के ह्रदय में विषमता की सोच पनपती है सही है नजरिये का अंतर है कृपया सभी इस अंतर को कम करने की कोशिश कीजिये मेरे लिए नही तो एक सम्रद्ध और अखण्ड भारत के निर्माण के लिये